Monday, March 25, 2013

Another PRECIOUS GIFT from my maa.......


फिर जन्मदिवस आया तेरा,तू नन्ही गुडिया हो जाती
मैं खोल पोटली यादों की, जाने कब उनमें खो जाती

सूने एक गलियारे में, गूंजी जब तेरी किलकारी
पहचान मैं अपनी भूल गयी, जाती तुझ पर वारी वारी

माखन मिश्री तेरी बातें,सबका तू लाड सबका तू दुलार
भोली नटखट सी परी मेरी, तुझ में माँ पापा का संसार

छोटे छोटे नटखट करतब, नानू तुझसे करवाते थे
तू सहज इशारे करती जब, सब भौंचक से रह जाते थे

गुल्लक तो छोटी थी अपनी, पर दौलत भरी हज़ारों की
जब गोल मोल छोटी आई, सावन की मस्त फुहारों सी

चंचल चितवन और मंद हंसी , लायी कितनी ही सौगातें
होते सारे दिन सोने के, और चांदी की लगती रातें

तुझसे ही रंग हैं जीवन में, तू ही मेरी संचित थाती (थाती = खज़ाना)
अब शब्द खो गए हैं जैसे, क्या चाहूं मैं कह पाती

बीते पल लौट नहीं पाते, मैं क्यों उनमें भरमाती हूँ
तुम दूर नहीं पर दूर बहुत, नादान समझ पाती हूँ

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असीम प्यार और दुलार के साथ
तुम्हारी माँ

 

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