Monday, March 25, 2013

Tommorow is my B'day  as usual this day comes every year and goes too ......... no great shakes ....but one thing which i love most are the true feelings and love of my maa in the form of excellent  poetry which actually makes me wait for the next year...... this time it goes like this.....

 वह थिरक-थिरक आई जिस पल, आकृति लेती आशा मेरी
पल भर में बदल गयी जैसे, जीने की परिभाषा मेरी !!

इस मन के सूने कोने में, रुनझुन-रुनझुन सी होने लगी
वह हंसती तो में हंसने लगी, वह रोती तो में रोने लगी !!

हर तार मेरी उम्मीदों का झंकृत सा हुआ नूतन स्वर से
बोझिल-बोझिल से थकते कदम, उसके संग संग चले फिर से।

 छोटे-छोटे झीने-झीने तारों का ताना बाना सा
वह छूट गया भूली सब कुछ बस आगे बढ़ते जाना था
 
पथरीली राहें सरस हुई, ज्यों मंजिल खड़ी नज़र आये
पाने को जैसे कुछ शेष नहीं, यह सोच सोच मन हर्षाये।

 वह शक्ति-पुंज, वह ओज रूप, सामर्थ्यवान है ना भूले
इस आस में मैं जीती जाती वह आसमानों को छू ले।

मन चाहे उसे वह मिल जाए, जिसके तो लिए वह क़ाबिल है
बस नज़र हुलस के उठा देख, तुझको तो यहाँ सब हासिल है।

 जो शेष रहा है कुछ अब तक, में उसके लिए सब कर जाऊं
उसकी ख़ुशी की ख़ातिर तो में उस रब से भी लड़ जाऊं।

 जीवन की डोर बंधी उससे जाने ये कैसा नाता है
कब नील गगन में कट जाए एहसास यह मन में लाता है।

 उससे तो इतर में कुछ भी नहीं फिर दूर कहाँ जा पाउंगी
तुम नैन मूँद देखा करना , मैं मंद-मंद मुस्काउंगी।

 
--असीम प्यार और दुलार के साथ

तुम्हारी माँ

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